अध्याय 48

माहौल एकदम जम-सा गया।

उसी पल ऑपरेशन थिएटर की बत्ती बुझ गई।

इसाबेला को स्ट्रेचर पर बाहर लाया गया। अमेलिया दौड़कर आगे बढ़ी, उसकी आँखों में आँसू भर आए। “इसाबेला, मेरी बात सुन रही हो?”

डॉक्टर ने मास्क उतारा। “बच्ची अभी भी बेहोश है। कुछ घंटे तक होश में नहीं आएगी।”

अमेलिया की देह ढीली पड़ गई, वह लड़ख...

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